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बसंत पंचमी 2020 – Vasant panchami 2020

बसंत पंचमी 2020 – Vasant panchami 2020
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लेख सारिणी

बसंत पंचमी – Basant Panchami 2020

माघ शुक्लपक्ष पंचमी के दिन बसंत पंचमी (Basant Panchami) या सरस्वती पूजा (Saraswati Puja) देश भर में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. भारतीय पंचांग में छह ऋतुएं होती हैं. इनमें से बसंत को ऋतुओं का राजा (basant ritu in hindi) कहा जाता है. बसंत पञ्चमी के दिन से ही बसंत ऋतु का आरम्भ माना जाता है । वसंत ऋतु को सभी ऋतुओं का राजा अर्थात “ऋतुराज” कहा गया है इस दिन भगवान विष्णु, कामदेव तथा रति की पूजा की जाती है। आज ही के दिन भगवान श्रीराम माता शबरी के आश्रम में आये थे । इसी की खुशी में बसंत ऋतु के पांचवें दिन उत्सव मनाया जाता है, लेकिन आगे बढ़ने से पहले बसंत पंचमी का पौराणिक महत्व और पौराणिक कथा का आनंद लेना अति आवश्यक ताकि हमे इसकी महत्ता समझ आ सके और हम भी हर्षोल्लास से ये पंचमी मना सके |

बसंत पंचमी की पौराणिक कथा (Basant Panchami Story)

सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की। अपनी सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे। उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है जिसके कारण चारों आ॓र मौन छाया रहता है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल छिड़का, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही उसमें कंपन होने लगा।

इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति का प्राकट्य हुआ। यह प्राकट्य एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी। ब्रह्मा ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गया। पवन चलने से सरसराहट होने लगी। तब ब्रह्मा ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। ये विद्या और बुद्धि प्रदाता हैं। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण ये संगीत की देवी भी हैं। बसन्त पंचमी के दिन को इनके जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं।

ऋग्वेद में भगवती सरस्वती का वर्णन करते हुए कहा गया है– प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु

अर्थात : ये परम चेतना हैं। सरस्वती के रूप में ये हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं। हममें जो आचार और मेधा है उसका आधार भगवती सरस्वती ही हैं। इनकी समृद्धि और स्वरूप का वैभव अद्भुत है। पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण ने सरस्वती से ख़ुश होकर उन्हें वरदान दिया था कि वसंत पंचमी के दिन तुम्हारी भी आराधना की जाएगी और यूँ भारत के कई हिस्सों में वसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती की भी पूजा होने लगी जो कि आज तक जारी है।

वसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजन कैसे करे

  • वसंत पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें और पीले रंग के वस्त्र धारण कर लें.
  • इसके बाद घर के मंदिर की साफ – सफाई कर सरस्वती जी की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान करायें और इनकी प्रतिमा को पाट पर स्थापित कर लें.
  • अब गणेश जी की प्रतिमा को भी सरस्वती जी की प्रतिमा के साथ स्थापित कर लें.
  • अब पाट के आगे एक कलश रखें, फूल अर्पित करें, फूलों की माला चढ़ाएं, सफेद वस्त्र अर्पित करें, पीले रंग का फल चढाएं तथा श्रृंगार की वस्तुएं चढ़ाएं.
  • इन सभी वस्तुओं को चढ़ाने के बाद नव ग्रह की, गणेश जी की तथा सरस्वती जी की मुहूर्त अनुसार विधि पूर्वक पूजा करे.
  • इसके बाद सरस्वती जी की आरती करें और उन्हें भोग के रूप में मौसमी फल या बूंदी के लड्डू भोग लगाकर अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए, ज्ञान प्राप्त करने के लिए हाथ जोड़कर प्रार्थना करें.

बसंत पंचमी के दिन किये जाने वाले उपाय – Vasant Panchami Remedies

  • वाक सिद्धि प्राप्ति हेतु ,इस मंत्र का जाप करें – ओम् हृीं ऐं हृीं ओम् सरस्वत्यै नम:
  • आत्म ज्ञान की प्राप्ति के लिए इस मंत्र का जाप करें – ओम् ऐं वाग्देव्यै विझहे धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात्
  • बुद्धि व विवेक, दूरदर्शिता, चतुराई से सफलता मां सरस्वती गायत्री मंत्र से फौरन मिलती है – ॐ सरस्वत्यै विद्महे ब्रह्मपुत्र्यै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात्

माँ सरस्वती मानव के लिए परम आवश्यक, ज्ञान प्राप्ति की प्रथम सीढ़ी वाक शक्ति की अधिष्ठात्री हैं । बिना वाणी के अच्छाई-बुराई , सच-झूठ ,प्रेम एवं निष्ठुरता किसी का भी ज्ञान ही नहीं हो पाता। प्राचीनकाल में वेद, पुराण आदि समस्त शास्त्र कंठस्थ किए जाते रहे हैं। आचार्यों द्वारा शिष्यों को गुरु-मंत्र उनकी वाणी से ही मिलता है। प्राचीन काल में समस्त ऋषि मुनि, आचार्यो और आजकल स्कूल कालेजो में अध्यापको द्वारा ज्ञान प्रदान करने, छात्रों को समझाने में उनकी वाणी का प्रमुख स्थान है।

माना जाता है कि इसी दिन मनुष्य शब्दों की शक्ति से परिचित हुए थे अर्थात उसने बोलना सीखा था। इसलिए इस दिन सभी के साथ संयमपूर्वक शुभ और प्रेम वचन बोलने से ईश कृपा प्राप्त होती है। माँ सरस्वती मनुष्य के शरीर में उसके कंठ और जिह्वा में निवास करती है जो वाणी और स्वाद का स्वरूप है | मान्यता है कि इस दिन बोले गए वाक्य शीघ्र सफल होते है। अतः इस दिन शुभ वचन ही बोलने चाहिए ।

माता सरस्वती को विद्या की देवी कहा जाता है। विद्या, ज्ञान के बिना इस धरती में सब कुछ अधूरा है और इनकी कृपा से ही व्यक्ति को इस सृष्टि के परम आवश्यक विद्या एवं ज्ञान की प्राप्ति होती है । इसी ज्ञान के माध्यम से सृष्टि के लगभग समस्त कार्य सम्पादित होते है। वे उस शक्ति का प्रतीक हैं जो मानव को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाती है।

सरस्वती माता की आराधना से ही जातक को विद्या एवं ज्ञान के साथ साथ तमाम ललित कलाओं जैसे संगीत, साहित्य, कविता, वाकपटुता आदि में भी निपुणता प्राप्त होती है।कहते है कि इनकी अनुकम्पा से ही महर्षि वाल्मीकि ने संसार के सर्वप्रथम महाकाव्य रामायण की रचना की थी । महर्षि वेदव्यास ने पुराणों की रचना के लिए माता सरस्वती जी की आराधना की थी ।

ब्रह्मवैवर्त पुराण में लिखा है कि भगवान श्रीकृष्ण ने माँ सरस्वती जी को यह वरदान दिया था कि माघ–शुक्ल–पंचमी के दिन तथा विद्यारंभ करते समय सभी लोग आपकी पूजा करेंगे तभी उन्हें वास्तविक ज्ञान की प्राप्ति होगी । मान्यता है कि सरस्वती देवी की महिमा से, इनकी कृपा से मंदबुद्धि भी महा विद्धान बन सकता है। इसीलिए इस दिन प्रत्येक विद्यार्थी के लिए सरस्वती पूजा अति शुभ मानी गयी है, और जिन्हे जीवन में अच्छी शिक्षा, उत्कृष्ट ज्ञान चाहिए उन्हें सच्चे मन, पूर्ण श्रद्धा से इस दिन माँ सरस्वती की आराधना अनिवार्य रूप से करनी चहिये।

विद्यार्थियों के लिए बसंत पंचमी का महत्व

इस दिन ना केवल विद्यार्थियों वरन सभी जातको को सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत होकर साफ पीले वस्त्र पहनकर, गंगाजल, दूध व दही से स्नान के बाद धूप दीप जलाकर पीले फूल, पीले मिष्ठान अर्पण करके माँ की आराधना करनी चाहिए और उनसे विवेक, ज्ञान और सद्बुद्धि का आशीर्वाद लेना चाहिए। बसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता के चरणों पर गुलाल चढ़ाकर देवी सरस्वती को श्वेत वस्त्र पहनाएं / अर्पण करें । इस दिन पीले फल, मालपुए और खीर का भोग लगाने से माता सरस्वती शीघ्र प्रसन्न होती है ।

बसंत पंचमी का दिन बच्चो की शिक्षा प्रारम्भ करने का सबसे उपर्युक्त दिन माना जाता है । बसंत पँचमी के दिन आप अपने सभी बड़े, परिचितों, और गुरुओं के प्रति सम्मान अवश्य ही व्यक्त करें । उनके पास जाकर अभिवादन करें अगर हो सके तो उन्हें कोई उपहार या फूल ही दें, उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करें । यह सच्चे मन से बताएँ की वह आपके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है ।

ज्योतिष के लिए बसंत पंचमी का महत्व

भारतीयज्योतिषशास्त्रके अनुसार वसंत पंचमी को अति शुभ माना गया है, इस दिन को स्वयंसिद्ध मुहूर्त घोषित किया गया है। अर्थात इस दिन कोई भी काम बिना मुहूर्त देखे ही किया जा सकता है। सभी पवित्र कार्य जैसे मुंडन, यज्ञोपवीत, सगाई, विवाह , तिलक, गृहप्रवेश आदि सभी मांगलिक कार्य इस दिन अति शुभ फलदायी माने गए हैं। बसंत पंचमी के दिन गहने, कपड़े, वाहन आदि की खरीदारी आदि भी अति शुभ है । इस दिन यथा संभव ब्राह्मण को दान आदि भी अवश्य ही करना चाहिए ।

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